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सहज योग ध्यान के माध्यम से तनाव प्रबंधन पीडीएफ़ मुद्रण ई-मेल
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द्वारा लिखित Administrator   
मंगलवार, 24 नवम्बर 2009 15:40

आम तौर पर वैज्ञानिक सिद्धांत द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि मनुष्य एक सामाजिक जानवर और बौद्धिक क्षमताओं के साथ सशक्त है जो लगातार कोशिश करता है अपने जीने के तरीके को बेहतर बनाने के लिये. इसका मतलब यह है कि हर व्यक्ति को समाज और उसकी विशेष रूप द्वारा निर्धारित मानदंडों के भीतर कार्य करना होता है. सभ्यता के लंबे सालो से भी अधिक, हमने विकसित किया है एक समाज की जटिल संरचना जो कई मायनों में खंडित है. मापदंडों के आधार पर,संस्कृति, व्यवसाय, जाति,धर्म. इसी प्रकार एक व्यवसायिक को कार्य के साथ और भी कार्य को पूरा करना होता है उसकी / उसके कैरियर आकांक्षाओं, कंपनी प्रतिबद्धताओं, परिवार के दायित्वों और सामाजिक उम्मीदें भी. महिलाओं के लिए काम प्रतिबद्धता है, सख्त परिवार प्रतिबद्धता, और सामाजिक बंधन. इसी प्रकार दुनिया मे बढ़ती जनसंख्या की पूर्ति के लिए कोशिश कर रहे है सीमित संसाधनों की. आजकल सभी व्यक्तियों की आकांक्षाए बढ़ रही है,सभी समूहो की,राज्यों, देशों की, जिससे प्रभावित हो रहे है प्रौद्योगिकी,मीडिया और भी जगह. प्रत्यक्ष परिणाम से बढ़ रहा है राज्य की प्रतियोगिता, जो कि व्यक्तियों, समूहों, और सभी स्तरों के देशों, और समाज के बीच है. परिणाम: उच्च दबाव है ... लेकिन यह प्रदर्शन करना ही चाहिए और हमे अपने काम को जारी रखने के लिए और हमारे दायित्वों को पूरा करने की कोशिश करनी चहिये.

इसलिए जाना है, लेकिन क्या कीमत पर?

यदि कोई एक मूल्यांकन करे वर्तमान स्थिति की या समाज की सामान्य स्थिति की, तो यह स्पष्ट है कि कुछ भी ठीक नहीं है. वहाँ तेजी से बढ़ती स्थिति है, गरीबों के स्वास्थ्य, हिंसा, अपराध आदि की.

 

यह क्यों हो रहा है?

आज की दुनिया व्यक्तिगत वृद्धि की आकांक्षाओं और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण के साथ एक बढ़ती मंदी की घटना जो की व्यक्तिगत के खिलाफ दीवार मे धक्का दे रही है. वह / वो काम करता है जबरदस्त दबाव के खिलाफ उसके प्रयासों के परिणाम को बिना सुनिश्चय किये हुये. यह तनाव की स्थिति की ओर जाता है. आज तनाव एक अकाट्य सच्चाई है! एक वास्तविकता है जो कि वहाँ से कोई नहीं बच सकता. इसलिये एकमात्र विकल्प ही वह है प्रबंधन का प्रयास. चिकित्सा विज्ञान को पता चला है असंख्य और अक्सर घातक रोगों का कारण तनाव है. हमारा एक बेचैन उम्र का एक युग है, जहां पुराने मूल्यों के टूटने के कारण और हमारे व्यक्तित्व के बिखरने से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं. इस का परिणाम जबरदस्त मानसिक गड़बड़ी और तनाव है खुशी जैसे हमसे दूर जा रही है और हम लगातार जवाब की मांग कर रहे हैं विभिन्न देशों के लोग धर्म और समुदायों के नाम पर आपस में एक युद्ध लड़ रहे है.

 

वास्तव में, श्री माताजी निर्मला देवी का कहना है, "हम अपने आप से युद्ध लड़ रहे हैं हमे शांति कैसे मिल सकती है? हम झूठ के नाम पर सब कुछ सच बनाते है, हमे प्रकाश की खोज कैसे हो सकती है? "

 

आत्मज्ञान ही तरीका है जहा से हमे प्रकाश मिल सकता है.

 

सहज योग आत्म बोध की एक सरल तकनीक है, जिसमें निष्क्रिय ऊर्जा है, जो तुम्हारे भीतर जन्मजात है जो कॉस्मिक ऊर्जा के साथ जागी और जुड़े है.

 

सहज योग श्री माताजी निर्मला देवी के तरफ से मानवता के लिए उपहार है.आत्म - बोध मानव अस्तित्व के अंतिम उद्देश्य है. यह एक है आनुभविक निरीक्षण वैज्ञानिक विधि हैं जिसमे बताते है कि कैसे हमारी इच्छा द्वारा हमारे भीतर एक पूर्ण रूप के साथ बना कुंडलिनी है.

 

मानव तंत्रिका तंत्र में विभिन्न सूक्ष्म केंद्र हैं, जिसे चक्र कहा जाता है और वे नियंत्रण करता है शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक को ताकि वह अच्छी तरह से कार्य कर सके. चक्र प्रतिनिधित्व करता है विभिन्न चरण विशेष को विकास की ओर तथा प्रत्येक चक्र मे निरपेक्ष के गुण होते है. इन नाजुक चक्रों के कामकाज की समझ और व्यक्ति का कनेक्शन अपनी आत्मा के साथ यह सब योग का उद्देश्य है.

 

तनाव क्या है?

तनाव वह सब कुछ है जिसका कारण भय, चिंता, आशंकाओं गुस्से और उत्तेजन, जब हम दैनिक जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करते है,फिर चाहे वह मानसिक या भावनात्मक हो. निरंतर निपटने के प्रयासों से ऐसी स्थितियों पैदा हो जाती है जिसका मानव सिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे मानसिक और भावनात्मक तनाव होता है और यह रोग होता है. विभिन्न क्षेत्रों के डॉक्टरों के साथ विचार विमर्श के बाद डॉ. वेर्नोन कोलेमन, के अनुसार यह निष्कर्ष आया है कि ९०-९५% बीमारिया मुख्यतः मनोवैज्ञानिक दबाव के कारण होती है,९८% सिरदर्द या तनाव से संबंधित हैं, एक विशाल बहुमत बदहजमी की वजह से तनाव आदि कि सम्सया हो रही हैं.

 

कुछ तनाव अच्छा है पर अधिक तनाव सही नही है,बोरियत और अवसाद को दूर रखने से तनाव मे सुधार पाया गया है. उच्च उपलब्धियों और उच्च आत्म सम्मान की भावना सक्षम बनाता है एक व्यक्ति जब उच्च और उच्च तनाव के स्तर से निपटता है तो इष्टतम स्तर या तनाव की सीमा तक पहुँच जाता है.

 

 

तनाव सीमा क्या है?

तनाव सीमा वह बिंदु है जहाँ किसी भी अधिक दबाव उत्पादक काउंटर बन जाएगा.यह बिंदु जहां अधिक दबाव का नेतृत्व होता है वहा उत्पादकता और संतुष्टि गिर जाते हैं.

 

यह बिंदु प्रत्येक व्यक्ति के लिये अलग अलग है,यह निर्भर करता है व्यक्ति कि दबाव से निपटने की क्षमता पर. कुछ लोग उच्च स्तर के दबाव को बनाए रख सकते है,जबकि कुछ तनाव मामूली मात्रा के अंतर्गत बहुत अधिक पनपने लगते है. गतिविधि और निष्क्रियता के स्तरों मे काफी तनाव हो रहे हैं एक छोर से दूसरे छोर तक हम निष्क्रियता का सामना कर सकते हैं, यह गतिविधि है जिसके साथ हम सामना कर सकते हैं. अगर उन दोनों के बीच संकीर्ण सीमा है तो वह है तनाव से ग्रस्त.

 

तनाव हानिकारक कब है?

 

खुद के द्वारा तनाव कभी भी एक समस्या का कारण नहीं बनता है. यह एक तरीका है तनाव का,जो समस्याओं की ओर जाता है.आम तौर पर प्रतिक्रिया में तीन चरण है.

 

अलार्म - एक चुनौती या खतरे का सामना करना,अत्यधिक उत्तेजित, हृदय की दर बढ़ना, मांसपेशियों में तनाव होना, और श्वास का तेज हो जाना तंत्रिका तंत्र है. शरीर प्रणाली तैयार है अब लड़ने या भागने के लिए.

 

प्रतिरोध - तनाव उत्पादन का कारण शरीर की रसायन स्थिति को लगातार समायोजन करना है (अधिवृक्क का सतत प्रवाह और अन्य ग्रंथियों के स्राव और शरीर को एक स्तर तक अधिक आसान बनाये रखने के लिए व्यवस्था करने की जरूरत है)

 

थकावट - यदि चुनौती एक लंबे समय के लिए जारी रहती है, तब संसाधनों और प्रतिरोध का उपयोग किया जाता है. वे शारीरिक अनैच्छिक प्रतिक्रिया है, तनाव जो अंतर्निहित तंत्र में मानव शरीर में मौजूद है. यहां तक की वह कल्पना या एक आगामी स्थिति के बारे में सोच सकते हैं.

 

इसलिए जब तक समस्या का हल है हम आराम करने के लिए सक्षम हैं,और तनाव के तीव्र प्रभाव एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए खतरनाक नहीं हैं. आपात स्थिति के कारण घटनाओं को दोहराना , व्यक्ति के माध्यम से अलार्म और प्रतिरोध समय के चरणों को पारित किया है और फिर से भावनात्मक समस्याओं के कारण थकावट, रोग या दबाव से प्रदर्शन के स्तर मे गिरावट, उत्पादकता और तनावपूर्ण संबंध परिवार और कार्यस्थल के भीतर.

 

तनाव प्रबंधन

तनाव से निपटने के तरीकों को विकसित करने मे कुछ वर्ष लगे. शराब, धूम्रपान, ड्रग्स आदि, जो हानिकारक हैं इससे निपटने के कई उपाय किये. आराम की तकनीक को दूसरों की तुलना में और अधिक प्रभावी होना पाया गया है और ध्यान सबसे अच्छा आराम तकनीक है. सहज योग में ध्यान का नियमित अभ्यास, आत्मज्ञान के बाद, व्यक्ति के रूप में आवश्यक परिवर्तन ला सकता है इसके अतिरिक्त घटनाओं और स्थितियों की ओर संतुलित दृष्टिकोण का तरीका मिलता है.

 

सहज योग के माध्यम से तनाव प्रबंधन

सहज योग ध्यान संतुलन लाता है सहानुभूति और पैरा सहानुभूति तंत्रिका तंत्र के बीच, आमतौर पर देखा गया है की सहज योग ध्यान की प्रक्रिया तनावपूर्ण स्थितियों मे तनाव विकारों को रोकने के लिये मदद करता है.

 

तकनीक सरल है, यह एक तंत्र को सक्रिय करने का एक तरीका है,कुंडलिनी, जो दिव्य ऊर्जा है वह निष्क्रिय झूठ का आधार रीढ़ पर है. यह तंत्र हमारे ज्ञान के चलते बल का और एक जीवित शक्ति का है, जो आत्म संगठन और स्वयं उत्थान करना चाहता है. यह स्वयं संगठन मानव प्रणाली की सुरक्षा को बनाये रखता है. आत्म - उत्थान अपनी सहज को नवीनीकरण, संतुलन और पुनर्चक्रण करने की क्षमता है, इसके अलावा इसमे शरीर और सामूहिक चेतना प्राप्त करने की क्षमता है.

 

अभी हाल तक प्रक्रिया साधारण मनुष्यों के लिए उपलब्ध नहीं थी.लेकिन श्री माताजी निर्मला देवी को मानवता नेतृत्व में जिस तरह से सिद्ध किया है वह इसके विकास का अगला कदम है. उनकी असाधारण आध्यात्मिक शक्तियों से हम सब का विकास संभव है. सहज योग तकनीक बहूत सहज और सरल है जो अभ्यास के द्वारा सीखा जा सकता है. जो सहज योग ध्यान एक अलग आयाम है जो हमारे मस्तिष्क को सक्षम बनाता है. यह ऊर्जा की एक नयी आपूर्ति के लिए उपलब्ध है. इस स्तर मे लोगों को वास्तविक अनुभवों,आंतरिक शांति, पूर्ण स्वास्थ्य और अच्छे कार्य की भावना मिल रही है. यह अल्हड़ जागरूकता है और व्यक्ति को लगता है सिर पर और हाथों की हथेलियों पर कंपन और ठंडी हवा आ रही हो.

 

हाल ही में व्यक्तियो को सहज योग के विभिन्न समूहों पर किए गए शोध साधक के बारे पता चला है कि सहज योग अभ्यास तनाव,चिंता,अवसाद,और उच्च रक्तचाप को कम करता है. ध्यान के साथ वहाँ भीतरी शांति, सद्भाव आत्म नियंत्रण,और आत्म जागरूकता का एक अनुभव भी संभावित है.

 

विद्युत मस्तिष्क गतिविधि

रिपोर्ट (ईईजी) निम्नलिखित में परिवर्तन का संकेत सहज योग ध्यान के दौरान मस्तिष्क गतिविधि:

 

१. प्रारंभिक स्तर पर, ध्यान, अल्फा मस्तिष्क शुरू की लहर पैटर्न बढ़ जाती है, जो आराम से जागरूकता का भाव पैदा करती है.

२. फिर एक बहुत ही गहरे ध्यान के दौरान राज्य, ईईजी पैटर्न मे परिवर्तन और इस समय उच्च क्षमता बीटा चोटिया फटने लगते हैं.

 

इन सभी किए गए अध्ययनों से पता लगता है कि मानव तंत्रिका प्रणाली एक पूरी तरह से अलग तरीके से कार्य करती है सहज योग ध्यान के अभ्यास के बाद. स्पष्ट रूप से कुछ अन्य नाटकीय परिवर्तन रिपोर्ट कर रहे हैं:

 

१. ऑक्सीजन की खपत कम हो जाती है ध्यान शुरू करने के ५ मिनट के भीतर.

२. हृदय की दर और श्वसन की दर भी कम हो.

३. खून लैक्टेट एकाग्रता, जो उच्च राज्यों के साथ जुड़ा हुआ है और यह चिंता भी कम करता है.

४. अद्रेनलिन , जो उच्च रक्तचाप के साथ संबद्ध करता चला जाता है.

५.रसायनिक क्रिया द्वारा उत्पन्न करनेवाली विद्युत त्वचा प्रतिक्रिया की गतिविधि का एक उपाय है पसीने की ग्रंथियों. यह संबंधित है सहानुभूति तंत्रिका तंत्र से, जो नियंत्रित करता है तनाव या छूट के स्तर को . सहज योग अभ्यास के बढ़ने से त्वचा प्रतिरोध तनाव काफी कम हो जाता है.

 

लेडी हार्डिंग अस्पताल, नई दिल्ली, डा. डी चुग ने आयोजित किया है प्रयोगात्मक अध्ययन.

 

 

चिकित्सीय अनुप्रयोगों

 

१. सहज योग के उपचार में जबरदस्त सफलता हासिल की है हाल ही में चिकित्सा जांच से पता चला है कि असंख्य जीर्ण घातक रोगों जैसे व्यक्तियो को उच्च रक्तचाप, कैंसर से पीड़ित, क्रोनिक,दमा, मिरगी, मधुमेह, गठिया और हृदय रोग आदि है सहज योग ध्यान के अभ्यास के बाद यह रोगो को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है.

 

२. एक और चौंकाने की बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया के चिकित्सा प्रलेखित मे सहज योग का उपयोग करके एड्स के इलाज के मामलों मे सफलता मिली है.

 

३. सहज योग के प्रभाव से डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा प्रोत्साहित हुये है जहां सहज योग तकनीक सेबहुत किस्म के पीड़ित रोगियों के लिए आवेदन किया गया और उनकी बीमारिया दूर हुयी की गयी.

 

४. वास्तव में, डा. वेलेन्तिना गोस्तेर, जो सामान्य अस्पताल मे एक बच्चों के चिकित्सक के रूप में सोवियत संघ में काम करते है, वह सक्षम थे दो रोगियों को जीवन का एक नया पट्टा देने के लिए. एक बच्चा था जिसका ११ इंच का जिगर थ,जहां सभी नैदानिक और शल्यचिकित्सको की टीम के द्वारा भी कोई उचित परिणाम नहीं निकले. अंत में वह बच्चे का इलाज सहज योग द्वारा किया गया और धीरे धीरे वह बच्चा बिल्कुल सही हो गया. वही दूसरी तरफ डॉक्टरो के सामने घातक अस्थमा का एक और मामला आया, जहां आदमी जो अस्थमा के दौरे के बाद ध्वस्त हो गया था, वह पिछले ४५ वर्षों से दमा से पीड़ित था पर सहज योग द्वारा वह पूरी तरह से सही हो गया और सहजता महसूस करने लगा.

 

५. इसके अलावा, डॉ. चुग ने सहज योग द्वारा उच्च रक्तचाप और दमा पर अग्रणी काम करके प्रयोगात्मक सबूत के साथ लाभदायक प्रभाव दिखाया. आजकल हाइपर तनाव का दिन प्रतिदिन बढ़ना, सहज योग के अभ्यास से असंतुलित तंत्रिका तन्त्र का सही संचार.

 

६. इसके अलावा, मधुमेह, रक्त, गुर्दे और हृदय की परेशानिया और कैंसर, त्वचा विकार, आहार, एनजाइना और मिर्गी इन असंतुलनों को दूर करने और शांति प्राप्त करने के लिये सहज योग करना अनिवार्य है.

 

 

विभिन्न क्षेत्रों में सहज योग

 

सहज योग के द्वारा बच्चो की बुद्धि को विकसित किया जा सकता है और संचार कौशल से अपनी क्षमता को यथार्थ बनाया जा सकता है.भारत,सोवियतसंघ और इटली मे सहज योग तकनीक क इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि स्कूलों मे युवा लोगो को अपने जीवन को समृद्ध और उन्हें पोषण बनाने मे मदद मिल सके.

 

कृषि के क्षेत्र में सहज योग का प्रयोग किया गया, जिसमे सहज योगीयो द्वारा उर्जा युक्त पानी देने से कृषि मे तेजी से और ज्यादा विकास हुआ है. पौधों की वृद्धि को सक्रिय करने के अलावा, सहज योग विधि बीजों के अंकुरण क्षमता में सुधार भी लाता है. यह विधि खत्म होते जंगलों और खेतों के लिये बहुत अच्छा है.

आजकल के मुद्दे हैं जैसे प्रदूषित पर्यावरण, ओजोन परत की कमी आदि.

 

सहज योग इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है,मानवता, ब्रह्मांडीय रखरखाव के बुनियादी स्तर पर संतुलन ला सके.इस प्रकार, सही कार्रवाई करके आदमी विकास और धर्म के रास्ते पर अग्रणी है.

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श्री माताजी

Shri Mataji Nirmala Devi

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